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इस मई दिवस 2021 पर, सीटू

पूरी दुनिया के मजदूर वर्ग और मेहनतकश वर्गों के उन सभी लोगों को सलाम करता है, जो भारी व्यक्तिगत नुकसान झेल रहे हैं और अपनी जान जोखिम में डालकर अर्थव्यवस्था को फिर से पहियों पर लाने और दूसरों के जीवन की रक्षा करने का प्रयास कर रहे हैं।
कोविद-19 महामारी के कारण जान गंवाने वाले लाखों लोगों के परिवारों और दोस्तों के साथ शोक संवेदना व्यक्त करता है।

इस मई दिवस पर, सीटू

दुनिया भर में मजदूरों और कामकाजी जनता के साथ बिरादराना एकजुटता को व्यक्त करता है, जो एक ओर कोविद महामारी का मुकाबला बहादुरी से कर रहे हैं और दूसरी ओर आजीविका, अधिकारों और काम की परिस्थितियों पर शासक वर्गों और उनके सत्तासीन एजेंटों के हमलों से जूझ रहे हैं।

कोविद महामारी जो कि डेढ़ साल से जारी है, क्योंकि यह पहली बार 2019 के अंत में दिखाई दी जिसने 
पूँजीवादी व्यवस्था के बदसूरत, क्रूर और बर्बर चेहरे को उजागर किया है जो एक व्यवस्था के तौर पर, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अभूतपूर्व प्रगति के बावजूद, अधिकांश जनता की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने और उनके जीवन की रक्षा करने में विफल रही है; एक व्यवस्था जहाँ स्वास्थ्य नागरिकों का मूल अधिकार नहीं है, लेकिन केवल उन लोगों के लिए आरक्षित है जो इसे खरीद सकते हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, भोजन तेजी से गरीबों की पहुँच से बाहर होते जा रहे हैं। महामारी के दौरान कामकाजी गरीबों की संख्या में वृद्धि हुई है। लाखों लोग अपनी नौकरी खो चुके हैं। उन्नत पूँजीवादी देशों के साथ-साथ, दुनिया का सबसे धनी और सबसे शक्तिशाली देश, संयुक्त राज्य अमेरिका इस बात का एक शानदार उदाहरण है कि कैसे सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल की उपेक्षा और निजी बीमा आधारित स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने के कारण महामारी से, हजारों रोके जा सकने वाली मौतें हुईं। भारत आज उन्ही के साथ में खड़ा है।

आज, कोविद के टीके कुछ उन्नत देशों द्वारा नियंत्रित और सुव्यवस्थित किए जा रहे हैं। कई गरीब देशों को टीकों के उपयोग से वंचित किया जा रहा है।
कोविद-19 महामारी के अनुभव ने फिर से समाजवादी व्यवस्था की श्रेष्ठता को उभारा है, जो पूँजी से अधिक जनता को प्राथमिकता देता है। कोविद-19 के प्रसार को प्रभावी रूप से रोका जा सका है और सार्वभौमिक सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल और शीघ्र सरकारी हस्तक्षेप प्रदान करके समाजवादी देशों में मृत्यु दर में कमी आयी है। चीन, वियतनाम और उत्तर कोरिया ने इस बीमारी पर काबू पाने और जनता के स्वास्थ्य, जीवन और आजीविका की रक्षा करने का रास्ता दिखाया है। चीन और वियतनाम भी अपनी अर्थव्यवस्थाओं को पटरी पर लाने में सफल रहे हैं।

चीन ने फरवरी 2021 में अंतिम 9 करोड़ 89 लाख 90 हजार ग्रामीण निवासियों को गरीबी से निकालकर गरीबी पर ‘पूर्ण विजय’ हासिल कर ली है। यह संयुक्त राष्ट्र के 2030 एजेंडा में सतत विकास के लिए निर्धारित गरीबी उन्मूलन लक्ष्य के निर्धारित समय से लगभग 10 साल पहले पूरा किया गया है। यह उस स्थिति में और भी अधिक महत्वपूर्ण है, जहाँ यूएनडीपी के अनुमान के मुताबिक, महामारी के दीर्घकालिक प्रभाव के परिणामस्वरूप 2030 तक दुनिया भर में 20 करोड़ 70 लाख लोग अत्यधिक गरीबी के गर्त में गिर सकते हैं।
अमेरिकी साम्राज्यवाद द्वारा अमानवीय नाकाबंदी और प्रतिबंधों के बावजूद, क्यूबा ने एकजुटता की एक अनुकरणीय कार्रवाई में महामारी से निपटने के लिए, न केवल अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में, बल्कि इटली जैसे उन्नत पूँजीवादी देशों में दुनिया भर के 51 से अधिक देशों की सहायता के लिए डॉक्टरों और पेशेवर स्वास्थ्य कर्मियों की अपनी टीमों को भेजा है। सीटू की माँग है कि दुनिया भर में निस्वार्थ चिकित्सा सेवाओं के लिए क्यूबा के डॉक्टरों को नोबेल पुरस्कार दिया जाए।

जबकि उन्नत पूँजीवादी देश अन्य देशों की जनता को उनके द्वारा विकसित किए गए टीकों को उपलब्ध कराने के लिए तैयार नहीं हैं, चीन 53 देशों को कोविद वैक्सीन की आपूर्ति कर रहा है। क्यूबा भी ईरान, वेनेजुएला और अन्य जरूरतमंद देशों को टीके की आपूर्ति कर रहा है।

को अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय पूँजी और अमेरिकी साम्राज्यवाद के बहुआयामी साजिशों का सामना करते हुए समाजवादी व्यवस्था को बनाए रखने और बचाव के लिए समाजवादी देशों की जनता का सीटू गर्मजोशी से अभिनन्दन करता है। इस मई दिवस पर, सीटू समाजवादी देशों के साथ अपनी एकजुटता दोहराता है।

अमेरिकी साम्राज्यवाद द्वारा विशेष रूप से लैटिन अमेरिका, फिलिस्तीन, मध्य-पूर्व और एशिया प्रशांत क्षेत्र को लक्षित करते हुए अपनी दबंगई कायम करने के लिए बढ़ते आक्रामक शड्यंत्रों को चिंता के साथ सीटू नोट करता है। यह विकासशील देशों पर अपने आर्थिक और राजनीतिक अधीनता के लिए दबाव बढ़ा रहा है। अभीे हाल ही में लक्षद्वीप के तट पर पानी भारत की सहमति के बिना ही अमेरिकी युद्धपोतों के सातवें बेड़े द्वारा भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में घुसपैठ है, जो भारत की संप्रभुता के लिए गंभीर चुनौती है। सीटू इस तरह के साम्राज्यवादी अहंकार की निंदा करता है और भाजपा सरकार से ऐसे अमेरिकी घमंड के खिलाफ हमारे देश के मजबूत विरोध दर्ज करने की माँग करता है

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