मई दिवस 2026 के इस अवसर पर, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) विश्वभर के उन मेहनतकश जनता को क्रान्तिकारी शुभकामनाऐं देता है जो संकटग्रस्त नवउदारवादी पूँजीवादी व्यवस्था के बढ़ते हमलों और आक्रामक साम्राज्यवादी वर्चस्ववादी आक्रमणों का मुकाबला करते हुए अपने अधिकारों, आजीविका और गरिमा की रक्षा कर रहे हैं। सर्वहारा अंर्तराष्ट्रीयवाद का समर्थन करते हुए, हम शोषण, भेदभाव और युद्ध के विरुद्ध तथा शांति, लोकतंत्र और बेहतर जीवन स्थितियों के लिए संघर्ष कर रहे सभी मजदूरों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त करते हैं।
सीटू भारत के मजदूर वर्ग को सलाम करता है, जिन्होंने पिछले वर्ष के दौरान देश भर के विभिन्न क्षेत्रों में अपने जुझारू संघर्षों को निरंतरता के साथ जारी रखा, जिसका परिणाम पिछले वर्ष केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र क्षेत्रीय फेडरेशनों के संयुक्त मंच के तहत दो बड़े पैमाने पर सफल राष्ट्रव्यापी आम हड़तालों के रूप में सामने आया।
और इसी क्रम में, प्रतिरोध और विद्रोह की पुकार उत्तर भारत के औद्योगिक क्षेत्रों - बरौनी और पानीपत से लेकर गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद और सूरत तक - और सैकड़ों अन्य औद्योगिक केन्द्रों में अधिक वीरता और जुझारू रूप में प्रकट हो रही है। तेलंगाना और कर्नाटक सहित दक्षिण भारत में, हजारों ठेका मजदूरों ने मजदूरों के बुनियादी अधिकारों, जैसे कि स्थायी न्यूनतम वेतन, आठ घंटे का कार्यदिवस, नौकरी की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और सम्मान पर हो रहे निरंतर हमलों के खिलाफ जुझारू संघर्ष शुरू कर दिया है। क्रूर दमन, गिरफ्तारियों, अवैध हिरासत और राज्य समर्थित धमकियों के बावजूद, मजदूरों ने अनुकरणीय साहस दिखाया है, यह साबित करते हुए कि मजदूर वर्ग के जुझारू संघर्ष की भावना को कुचला नहीं जा सकता।
सीटू उन फासीवादी और सत्तावादी दमन की कड़ी निंदा करता है जो राज्य तंत्र द्वारा देश के लिए मूल्य और संसाधन सृजित करने वाले मजदूरों के बुनियादी मानव अधिकारों के लिए किए जा रहे संघर्षों पर किया जा रहा है। मेहनतकश जनता के इन बुनियादी अधिकारों पर पूँजीवादी हमले और उनका हनन, मौजूदा कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों का घोर उल्लंघन है, जिनका राज्य तंत्र और केन्द्र तथा अधिकांश राज्यों की सरकारें अपने सबसे आज्ञाकारी सेवकों की तरह निर्लज्जतापूर्वक उल्लंघन कर रही हैं। मजदूरों को पीटा जा रहा है, नेताओं को हिरासत में लिया जा रहा है और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन केवल मजदूरों की कॉरपोरेट लूट को बचाने के लिए किया जा रहा है। राज्य सत्ता और बड़े पूँजीपतियों का यह नंगा गठबंधन सत्ताधारी शासन की व्यवस्था और उसके वास्तविक चरित्र को उजागर करता है। सीटू बड़े पूँजीपतियों द्वारा किए जा रहे इस क्रूर, राज्य-प्रायोजित शोषण की व्यवस्था के खिलाफ इस संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लेता है।
सीटू, वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियन्स (डब्ल्यूएफटीयू) के नेतृत्व में चल रहे अंर्तराष्ट्रीय वर्गोन्मुख मजदूर वर्ग आन्दोलन को साम्राज्यवाद और नव-फासीवादी ताकतों के खिलाफ निरंतर प्रतिरोध और भारतीय मजदूर वर्ग के संघर्षों के प्रति निरंतर समर्थन और एकजुटता के लिए बधाई देता है। हम नरसंहार का विरोध कर रहे फिलिस्तीनी जनता के साथ दृढ़ता से खड़े हैं। हम वेनेजुएला, ईरान और साम्राज्यवादी आक्रमण के विरुद्ध सम्प्रभुता की रक्षा कर रहे सभी देशों के साथ खड़े हैं। सीटू समाजवादी क्यूबा और उसकी जनता के साथ एकजुटता से खड़ा है जो साम्राज्यवाद की नाकाबंदी और आक्रमण के सबसे अमानवीय दौर से लड़ रहे हैं। सीटू समाजवादी देशों के मजदूर वर्ग को समाजवाद का ध्वज बुलंद रखने के लिए बधाई देता है।
डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व वाली अमेरिकी सरकार द्वारा ईरान पर छेड़ा गया मौजूदा युद्ध एक बार फिर साम्राज्यवाद के पूरी तरह विनाशकारी वर्चस्ववादी स्वरूप को उजागर करता है। यह युद्ध विश्व को पुनः उपनिवेश बनाने और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद फासीवाद की पराजय के बाद राष्ट्रों की सम्प्रभुता की रक्षा के लिए स्थापित अंर्तराष्ट्रीय व्यवस्था और सम्बन्धित संस्थानों को कुचलने का प्रयास करता है। हमें अमेरिकी साम्राज्यवादी गुंडागर्दी के खिलाफ ईरान के साहसी प्रतिरोध को भी ध्यान में रखना चाहिए। अमेरिकी साम्राज्यवाद की गैर-जिम्मेदार, असभ्य और उन्मादी कार्रवाइयों के कारण ही यह युद्ध पूरे पश्चिम एशिया में फैल गया है, जिसका विश्व अर्थव्यवस्था और मेहनतकश जनता पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। सैन्य आक्रामकता, हवाई हमले और आर्थिक नाकाबंदी ने इस क्षेत्र को अस्थिरता में धकेल दिया है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित कर दिया है, जिसमें महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य भी शामिल है, जिससे विश्व के तेल का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। यह युद्ध संसाधनों पर पूर्ण अमेरिकी नियंत्रण और अमेरिकी भू-राजनीतिक प्रभुत्व के लिए है, और इसका बोझ दुनिया भर की मेहनतकश जनता पर बढ़ती कीमतों, नौकरियों के नुकसान, उद्योगों के बंद होने, अनिश्चितता और असुरक्षा के रूप में पड़ रहा है। सीटू साम्राज्यवादी युद्धों के खिलाफ एक शान्तिपूर्ण दुनिया के लिए अपने प्रयासों को तेज करने के अपने संकल्प को दोहराता है।
सीटू अमेरिकी साम्राज्यवादी गुंडागर्दी और पूँजीवादी शासन के अधीन अधिकांश देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, की इस तरह के साम्राज्यवादी वर्चस्ववाद पर अवसरवादी चुप्पी का पुरजोर विरोध और निंदा करता है, जो अंर्तराष्ट्रीय कानून और व्यवस्था का पूर्ण उल्लंघन है। साथ ही, सीटू दुनिया के अधिकांश देशों, जिनमें अमेरिका और इजराइल भी शामिल हैं, में आम जनता, विशेष रूप से मेहनतकश जनता के निरंतर विरोध का स्वागत करता है और इससे प्रोत्साहित होता है, जो लाखों की संख्या में सड़कों पर उतरकर अमेरिकी बर्बरता की निंदा कर रहे हैं। इससे भारतीय मेहनतकश वर्ग द्वारा साम्राज्यवादी वर्चस्ववाद की निंदा और विरोध में अधिक मुखर और व्यापक आवाज उठाने की आवश्यकता भी सामने आती है, साथ ही केन्द्र में भाजपा सरकार के अमेरिकी निर्देशों के प्रति चाटुकारितापूर्ण रवैये को उजागर करने की भी आवश्यकता है। साम्राज्यवादी वर्चस्ववाद के प्रति हमारा विरोध और शांति के लिए हमारा प्रयास अमेरिकी साम्राज्यवादी युद्ध और गुंडागर्दी के उग्र विरोध और मोदी सरकार की अमेरिकी निर्देशों के प्रति चाटुकारितापूर्ण, आत्मसमर्पणकारी भूमिका पर केन्द्रित होना चाहिए, जो राष्ट्रीय हितों और जनता के हितों से गंभीर रूप से समझौता कर रही है। यह उस नवउदारवादी पूँजीवादी व्यवस्था के प्रति स्पष्ट और जुझारू विरोध पर आधारित होना चाहिए जिसे साम्राज्यवाद वैश्विक स्तर पर संरक्षित करने के लिए काम कर रहा है।
वैश्विक पूँजीवादी व्यवस्था गहरे संकट में है, जो गतिरोध, बढ़ती असमानता, बेरोजगारी और भुखमरी से ग्रस्त है। साम्राज्यवादी ताकतें इस संकट का पूरा बोझ मजदूरों और दक्षिण की जनता पर डालने का प्रयास कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर, विभिन्न देशों के मजदूर आन्दोलन प्रतिरोध में जुट रहे हैं, जो नवउदारवादी पूँजीवाद के विरुद्ध संघर्ष की एक नई लहर के उदय का संकेत है। सीटू विभिन्न महाद्वीपों के विभिन्न देशों में कामगारों के उन विभिन्न तबकों को सलाम करता है और उनके साथ एकजुटता से खड़ा है, जिन्होंने इस दौरान वर्ग शोषण के विरुद्ध वीरतापूर्ण संघर्ष किया है।
भारत में, मेहनतकश जनता एक कॉरपोरेट-साम्प्रदायिक और सत्तावादी शासन के आक्रामक का सामना कर रही है। श्रम संहिता की अधिसूचना और कार्यान्वयन का उद्देश्य कड़े संघर्षों से हासिल अधिकारों जैसे कि आठ घंटे का कार्यदिवस, न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और यूनियन बनाने का अधिकार आदि को समाप्त करना है, जिससे मजदूर अत्यंत अनिश्चितता की स्थितियों में धकेले जा रहे हैं। ऐतिहासिक मई दिवस के संघर्षों की उपलब्धियों को पूरी तरह से उलटने का प्रयास किया जा रहा है। ठेकाकरण, आउटसोर्सिंग, गिग वर्क और अनौपचारिकीकरण तेजी से फैल रहे हैं, जिससे एक विशाल अधिकारहीन कार्यबल का निर्माण हो रहा है यानी कि मजदूरों और जनता के लिए वस्तुतः गुलामी की स्थिति पैदा की जा रही है। राजनीतिक शासन प्रणाली को भी नव-फासीवादी दिशा में पूर्ण सत्तावाद की ओर धकेला जा रहा है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित उन्नत प्रौद्योगिकियों का उपयोग मुनाफों को अधिकतम करने की भावना से प्रेरित है, जिसके परिणामस्वरूप नौकरियों में कमी, निगरानी और शोषण में वृद्धि हो रही है। स्थायी रोजगार की जगह असुरक्षित और अनौपचारिक व्यवस्थाऐं ले रही हैं, जो मजदूरों को शोषण के एक नए तंत्र की ओर धकेल रही हैं जो आधुनिक दासता के समान है।
देश में अभूतपूर्व बेरोजगारी, वास्तविक वेतन में गिरावट और बढ़ती असमानता देखने को मिल रही है। वेतन का हिस्सा घट रहा है जबकि कम्पनियों के मुनाफे आसमान छू रहे है। जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय, भारत सरकार बड़ी ही बेशर्मी से साम्राज्यवादी दबाव के आगे झुक रही है और अपने नवउदारवादी एजेंडे को आक्रामक रूप से आगे बढ़ा रही है, जिससे देश की सम्प्रभुता खतरे में पड़ रही है और संविधान कमजोर हो रहा है। संघीय अधिकारों को और भी कम किया जा रहा है। राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन के माध्यम से निजीकरण, कृषि सहित प्रमुख क्षेत्रों में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और सार्वजनिक सेवाओं को खत्म करने से शोषण और भी बढ़ रहा है। रोजगार, भोजन, स्वास्थ्य और शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय में कटौती लाखों लोगों को और भी गहरी गरीबी में धकेल रही है, जबकि बढ़ता कर्ज मजदूरों और किसानों को संकट के दुष्चक्र में फंसा रहा है। सरकार द्वारा कठोर कानून लागू किए जा रहे हैं; मनरेगा जैसी अधिकार-आधारित योजनाओं को खत्म कर दिया गया है; और अमेरिका और कई अन्य देशों के साथ विनाशकारी व्यापारिक समझौते किए जा रहे हैं, जो स्थितियों को और भी बदतर बना देंगे।
साथ ही, लोकतांत्रिक अधिकारों पर गंभीर हमले हो रहे हैं। मजदूरों के संघर्षों का दमन, नागरिक स्वतंत्रता पर अंकुश और असहमति को दबाने के लिए राज्य की शक्ति का बढ़ता दुरुपयोग आम बात हो गई है। मेहनतकश जनता को विभाजित करने और उनकी एकता को कमजोर करने के लिए साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण को व्यवस्थित रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। महिलाओं के खिलाफ हिंसा, जातिगत उत्पीड़न और प्रतिगामी सामाजिक प्रथाऐं बढ़ रही हैं।
सीटू भारतीय कृषि पर हो रहे हमलों के खिलाफ किसानों द्वारा चलाए गए अनेक जुझारू संघर्षों को सलाम करता है। सीटू दृढ़ता से मानता है कि मजदूर वर्ग और किसानों की एकता इस कॉरपोरेट-साम्प्रदायिक गठजोड़ के खिलाफ सबसे शक्तिशाली हथियार है। मजदूरों और किसानों के बढ़ते संयुक्त संघर्ष, साथ ही उत्तर भारत के औद्योगिक क्षेत्रों में चल रहे जुझारू क्षेत्रीय आन्दोलन, इस कॉरपोरेट-साम्प्रदायिक गठजोड़ के खिलाफ एक व्यापक और अधिक शक्तिशाली जन आन्दोलन का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। सीटू नवउदारवादी साम्राज्यवादी हमलों से लड़ रहे अन्य सभी तबकों यानी कि महिलाओं, युवाओं, छात्रों, आदिवासियों, दलितों आदि सभी का भी अभिनंदन करता है।
इस मई दिवस पर, सीटू मजदूर वर्ग, किसान और सभी मेहनतकश जनता से निजीकरण, श्रम कानूनों में ढील, भारतीय कृषि पर कॉरपोरेट कब्जा, संघीय अधिकारों पर हमले, बेरोजगारी, महंगाई और तानाशाही दमन के खिलाफ एकजुट संघर्ष को तेज करने और इन सभी संघर्षों को क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त बनाने का आह्वान करता है। हम ट्रेड यूनियन अधिकारों की रक्षा करने, सुरक्षित रोजगार, जीवन निर्वाह योग्य वेतन और सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा के लिए लड़ने और साम्प्रदायिक, जातिगत या पंथीय आधार पर जनता को विभाजित करने के सभी प्रयासों का विरोध करने का संकल्प लेते हैं।
सीटू एक शक्तिशाली मजदूर-किसान गठबंधन बनाने और शोषण, असमानता और उत्पीड़न से मुक्त एक वैकल्पिक सामाजिक व्यवस्था के लिए संघर्ष को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है।
मई दिवस 2026 के अवसर पर, हम सीटू के 18वें सम्मेलन में तैयार की गयी उस समझदारी को दोहराना चाहते हैं, जो हमारे सभी कार्यों और पहलों के लिए मार्गदर्शक है। हम गंभीर व्यवस्थागत संकट से ग्रस्त नवउदारवादी पूँजीवादी व्यवस्था के विनाशकारी प्रभावों के खिलाफ लड़ रहे हैं। हमारा लक्ष्य इस बर्बर, शोषणकारी व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष को और भी सशक्त बनाना, इसे बदलना और साथ ही इसे जुझारू बनाकर अवज्ञा और प्रतिरोध की ओर अग्रसर करना है। मजदूर वर्ग सभी तबकों के मेहनतकश जनमानस के लिए इस संघर्ष का नेतृत्व करने के लिए बाध्य है, और इस संकट को सामाजिक परिवर्तन की दिशा में उन्मुख चेतना में परिवर्तित करेगा।
इस मई दिवस पर, मजदूर वर्ग आन्दोलन के षहीदों को याद करते हुए, सीटू निम्नलिखित प्रतिज्ञा करता हैः
मजदूर वर्ग और मेहनतकष जनता की सभी तात्कालिक माँगों पर एकजुट संघर्षों को तेज और मजबूत करने के लिए।
मजदूर-किसान एकता को मजबूत करने और व्यापक लोकतांत्रिक प्रतिरोध का निर्माण करने के लिए
पूँजीवाद और साम्राज्यवादी युद्धों के व्यवस्थागत संकट को उजागर करने और षोषणकारी व्यवस्था से ऊपर उठने के लिए चेतना की ओर अपने संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए, समाजवाद के संघर्ष की ओर बढ़ने के लिए।
मई दिवस जिंदाबाद!
मजदूर-किसान एकता जिंदाबाद!
नवउदारवाद मुर्दाबाद!
साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!
समाजवाद जिंदाबाद!


